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शिमला मेयर का कार्यकाल 5 साल करने पर हाईकोर्ट में सुनवाई, अगली सुनवाई 23 मार्च को

सरकार ने अदालत को बताया – मेयर का कार्यकाल 5 वर्ष करने वाले बिल को राज्यपाल की मंजूरी
याचिकाकर्ता बोले – कानून को पिछली तारीख से लागू नहीं किया जा सकता
हाईकोर्ट ने मामले को 23 मार्च तक के लिए सूचीबद्ध किया



शिमला। हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट में नगर निगम शिमला के मेयर के कार्यकाल को बढ़ाने से जुड़े मामले में वीरवार को फिर सुनवाई हुई। सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से महाधिवक्ता ने अदालत को बताया कि मेयर और उपमेयर का कार्यकाल ढाई वर्ष से बढ़ाकर पांच वर्ष करने वाले विधेयक को राज्यपाल की मंजूरी मिल चुकी है और इसे राजपत्र में भी प्रकाशित कर दिया गया है

सरकार की ओर से अदालत को बताया गया कि इस नए कानून के लागू होने के बाद प्रदेश के सभी नगर निगमों में मेयर और उपमेयर का कार्यकाल पांच वर्ष कर दिया गया है। इससे पहले सरकार ने 25 अक्तूबर 2025 को अध्यादेश लाकर नगर निगम शिमला के मेयर का कार्यकाल ढाई वर्ष से बढ़ाकर पांच वर्ष किया था

हालांकि, याचिकाकर्ता की ओर से अदालत में दलील दी गई कि राज्य सरकार द्वारा बनाया गया कानून पिछली तारीख से लागू नहीं किया जा सकता। इस पर अदालत ने याचिकाकर्ताओं को निर्देश दिया कि वे अपने सभी तथ्य और तर्क अगली सुनवाई में विस्तार से प्रस्तुत करें

मामले की सुनवाई के बाद मुख्य न्यायाधीश गुरमीत सिंह संधावालिया और न्यायाधीश बिपिन चंद्र नेगी की खंडपीठ ने इस मामले को दो सप्ताह बाद फिर सुनवाई के लिए सूचीबद्ध करने के निर्देश दिए। अदालत ने इस मामले की अगली सुनवाई 23 मार्च 2026 तय की है।

यह मामला फिलहाल प्रदेश की नगर निकाय राजनीति और प्रशासनिक व्यवस्था से जुड़ा अहम मुद्दा बन गया है, क्योंकि मेयर के कार्यकाल में बदलाव को लेकर राजनीतिक और कानूनी बहस तेज हो गई है।